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दैशिकशास्त्र की महत्ता और इसका वर्तमान स्वरूप जिसमें यह धरोहर हमारे पास उपलब्ध है। समाज को चलाने वाला मूल बल अर्थात् सुख एवं इसके प्रकार तथा मुख को सम्भालना एवं धारण करना देश, जाति, राष्ट्र और वैशिक धर्म की आवश्यकता, पहचान एवं प्रकृतिः बिति एवं बिराट् और इनकी महत्ता स्वतंत्रता एवं इसके विभिन्न स्वरूपः स्वतंत्रता पर पूर्व एवं पश्चिम की विचारधाराएँ राज्य के प्रकार, वर्णाश्रम व्यवस्था एवं अर्थ जगत संचालनः व्यवस्था धर्म एवं देशकाल दैवीसम्पद्, अधिजन्नन, अध्यापन एवं अधिलयन, लोकमत परिष्कार और इनकी क्या महनाः दाम्पत्य जीवन चलाने के मिद्धांत तथा देवी सम्पद्द योगक्षेम एवं विवर्धन एकात्म मानववाद दर्शन परिचयः 'वसुधैव कुटुंबकम्' से विश्वशांति का मार्ग |

दैशिक स्मारिका

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दैशिक शास्त्र संपादन

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दैशिक बाल साहित्य

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